सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में मुकदमे को पूरा करने के लिए तीन महीने का समय दिया, जिसमें भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, एम.एम. जोशी और उमा भारती शामिल थे और कहा कि 31 अगस्त तक फैसला सुनाया जाना चाहिए।
बाबरी मस्जिद विध्वंस केस. सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की स्पेशल CBI अदालत को कहा है कि 31 अगस्त 2020 तक सुनवाई पूरी करके फ़ैसला सुना दीजिए. जस्टिस आरएफ़ नरीमन और सूर्य कांत की बेंच ने कहा कि मामले की सुनवाई कर रहे जज इस बात की पुष्टि करें कि इस 31 अगस्त की डेडलाइन किसी हाल में बीते न.
19 जुलाई 2019 को इसी बेंच ने कहा था कि सारी सुनवाई 6 महीनों में पूरी कर लें, और 9 महीनों के भीतर कोर्ट अपना निर्णय सुना दे. मामले की सुनवाई कर रहे CBI जज श्री यादव का कार्यकाल 30 सितम्बर 2019 को पूरा होने वाला था. अदालत ने यूपी सरकार को आदेश भी दिया था कि उक्त जज का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए.
इस बार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वीडियो कॉन्फ़्रेन्स के ज़रिए सुनवाई करने और सबूत जुटाने का काम पूरा किया जाए. इस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती के साथ अन्य 13 लोग मुक़दमे का सामना कर रहे हैं. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने आपराधिक साज़िश की. जिसके बाद कारसेवकों ने 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया.
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