केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने पिनराई विजयन की LDF सरकार द्वारा पेट्रोल-डीज़ल पर लगाए गए अतिरिक्त टैक्स के विरोध में 'ब्लैक डे' मनाया। यह वही लेफ्ट है जिसके साथ कांग्रेस दिल्ली में I.N.D.I.A गठबंधन चलाती है — यह दोहरापन गठबंधन की ज़मीनी हक़ीक़त उजागर करता है।
एक तस्वीर दिल्ली की — राहुल गांधी, सीताराम येचुरी के उत्तराधिकारी और CPI-M के नेता एक मंच पर, मोदी सरकार के खिलाफ़ कंधे से कंधा मिलाए। दूसरी तस्वीर केरल की — उन्हीं राहुल की पार्टी के कार्यकर्ता काले बैज लगाए, काले झंडे उठाए, CPI-M की विजयन सरकार के पेट्रोल-डीज़ल टैक्स के खिलाफ़ सड़कों पर उतरे हुए। दो तस्वीरें, एक ही तारीख, एक ही गठबंधन — और बीच में एक ऐसी खाई जिसे कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस पाट नहीं सकती।
News18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने केरल में राज्यव्यापी 'ब्लैक डे' मनाया। निशाना था पिनराई विजयन की LDF सरकार का वह फ़ैसला जिसमें पेट्रोल-डीज़ल पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर राज्य के ख़ज़ाने को भरने की कोशिश की गई। UDF का तर्क सीधा है — जब केंद्र सरकार ईंधन की क़ीमतें कम कर रही है, तो विजयन सरकार राज्य टैक्स बढ़ाकर वह राहत छीन रही है।
यह तर्क अपनी जगह ठीक है। लेकिन असली कहानी ईंधन की क़ीमतों में नहीं, सियासी गणित में छिपी है।
गठबंधन का दोहरा चेहरा
I.N.D.I.A गठबंधन — जिसे 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP के खिलाफ़ 'एकता की ढाल' के रूप में पेश किया गया था — की सबसे बड़ी संरचनात्मक कमज़ोरी यही है कि इसके घटक दल राज्यों में एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं। केरल इसका सबसे नंगा उदाहरण है। यहाँ कांग्रेस और CPI-M के बीच दशकों पुरानी लड़ाई है — दो मोर्चे, UDF और LDF, बारी-बारी से सत्ता में आते हैं, और विपक्ष में रहने वाला दूसरे को ज़मीन पर कोई जगह नहीं देता। 'ब्लैक डे' इसी परंपरा की ताज़ा कड़ी है।
मगर ज़रा सोचिए — अगर कांग्रेस का केरल यूनिट विजयन सरकार को 'जनता का दुश्मन' बता रहा है, तो दिल्ली में उसी CPI-M के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस का क्या मतलब? और अगर CPI-M दिल्ली में कांग्रेस के साथ 'लोकतंत्र बचाओ' का नारा लगा रही है, तो केरल में कांग्रेस के ख़िलाफ़ उसकी नीतियाँ क्या संदेश देती हैं?
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि कांग्रेस का 'ब्लैक डे' सिर्फ़ फ्यूल टैक्स के बारे में नहीं है — यह 2026 के केरल स्थानीय निकाय और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी का पहला सार्वजनिक शंखनाद है। कांग्रेस का केरल यूनिट जानता है कि ज़मीन पर वोट I.N.D.I.A गठबंधन के नाम पर नहीं, UDF बनाम LDF की लड़ाई में मिलते हैं। ऐसे में विजयन सरकार की हर ग़लती को भुनाना उसकी मजबूरी है, चाहे दिल्ली में हाईकमान कितना भी 'एकता' का गीत गाए।
दूसरी तरफ़, ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि विजयन सरकार का फ्यूल टैक्स बढ़ाना भी राजनीतिक फ़ैसला है — केरल का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, केंद्र से मिलने वाले फंड पर विवाद चल रहा है, और सामाजिक कल्याण योजनाओं का ख़र्च कम करना CPI-M की वोट बैंक राजनीति के लिए आत्मघाती होगा। तो टैक्स बढ़ाओ, और कांग्रेस को विरोध करने दो — दोनों पक्षों के लिए यह एक 'सुविधाजनक टकराव' है।
(यह राजनीतिक विश्लेषण और गलियारों की चर्चा पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
I.N.D.I.A गठबंधन की असली परीक्षा
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि केरल का यह 'ब्लैक डे' I.N.D.I.A गठबंधन के लिए एक ख़ामोश लेकिन गहरा ज़ख़्म है। गठबंधन की ताक़त तब तक काग़ज़ी रहेगी जब तक इसके घटक दल राज्यों में एक-दूसरे का ख़ून नहीं पीना बंद करते। BJP को इस विरोधाभास को भुनाने के लिए कोई ख़ास मेहनत नहीं करनी — कांग्रेस और लेफ्ट ख़ुद ही वह काम कर रहे हैं।
असल सवाल यह नहीं है कि फ्यूल टैक्स सही है या ग़लत। असल सवाल यह है: क्या कोई गठबंधन सिर्फ़ दिल्ली के लिए ज़िंदा रह सकता है जब उसके अपने राज्यों में उसके साझेदार एक-दूसरे को चुनावी मैदान में दफ़नाने पर उतारू हों? पश्चिम बंगाल में TMC और कांग्रेस की कहानी भी यही है — ममता बनर्जी I.N.D.I.A के मंच पर आती-जाती हैं, लेकिन बंगाल में कांग्रेस को साँस लेने की जगह नहीं देतीं।
केरल की सड़कों पर काले झंडे लहरा रहे हैं, और दिल्ली के एसी कमरों में 'एकजुट विपक्ष' की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। यह दो अलग-अलग फ़िल्में नहीं हैं — यह एक ही फ़िल्म है, और इसका अंत वही होगा जो हमेशा होता है: जब ज़मीन और छत में इतना फ़ासला हो, तो इमारत ज़्यादा देर खड़ी नहीं रहती।
आने वाले हफ़्तों में देखिए — अगर CPI-M दिल्ली में कांग्रेस के साथ कोई संयुक्त बयान जारी करती है बिना केरल के फ्यूल टैक्स का ज़िक्र किए, तो समझ लीजिए कि दोनों पक्षों ने इस विरोधाभास को 'manage' करने का फ़ैसला किया है। और अगर कांग्रेस का केरल यूनिट इस 'ब्लैक डे' को सीरीज़ में बदलता है, तो 2026 की विधानसभा लड़ाई का बिगुल समझिए — I.N.D.I.A गठबंधन की शव-परीक्षा केरल से शुरू होगी।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
यहाँ रिपोर्ट किए गए आरोप नामित स्रोतों को श्रेय दिए गए हैं और जब तक अदालत ने फ़ैसला नहीं दिया, अप्रमाणित हैं; विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।
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मुख्य बातें
- केरल में कांग्रेस-UDF ने विजयन सरकार के फ्यूल टैक्स के खिलाफ़ 'ब्लैक डे' मनाया — वही लेफ्ट जिसके साथ दिल्ली में I.N.D.I.A गठबंधन चलता है
- यह विरोधाभास I.N.D.I.A गठबंधन की संरचनात्मक कमज़ोरी उजागर करता है — दिल्ली में एकता, राज्यों में ख़ूनी दुश्मनी
- कांग्रेस का केरल यूनिट जानता है कि वोट UDF बनाम LDF की लड़ाई में मिलते हैं, गठबंधन के नाम पर नहीं
- विजयन सरकार का टैक्स बढ़ाना राजकोषीय मजबूरी और राजनीतिक गणित दोनों है
- BJP को इस विरोधाभास को भुनाने के लिए कुछ करने की ज़रूरत नहीं — कांग्रेस और लेफ्ट ख़ुद यह काम कर रहे हैं
आँकड़ों में
- केरल में UDF बनाम LDF की दशकों पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति में दोनों बारी-बारी सत्ता में आते हैं — गठबंधन की 'एकता' यहाँ कभी ज़मीन पर नहीं उतरी
- केरल का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, जिससे विजयन सरकार पर फ्यूल टैक्स जैसे अलोकप्रिय फ़ैसले लेने का दबाव है — रिपोर्ट्स के अनुसार
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) और केरल की पिनराई विजयन सरकार (LDF/CPI-M)
- क्या: UDF ने केरल में फ्यूल टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ राज्यव्यापी 'ब्लैक डे' प्रदर्शन किया, News18 की रिपोर्ट के अनुसार
- कब: 2026 में, ताज़ा फ्यूल टैक्स बढ़ोतरी के तुरंत बाद
- कहाँ: केरल भर में — सड़कों, पेट्रोल पंपों और सरकारी दफ़्तरों के सामने
- क्यों: विजयन सरकार ने राज्य के राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए पेट्रोल-डीज़ल पर अतिरिक्त सेस/टैक्स लगाया, जिसे UDF ने जनता पर बोझ बताया
- कैसे: UDF ने काले बैज, काले झंडे और सड़क प्रदर्शनों के ज़रिए विरोध जताया; कांग्रेस नेताओं ने विजयन सरकार को जनविरोधी करार दिया
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
केरल में कांग्रेस ने 'ब्लैक डे' क्यों मनाया?
कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने पिनराई विजयन की LDF सरकार द्वारा पेट्रोल-डीज़ल पर लगाए गए अतिरिक्त टैक्स के विरोध में 'ब्लैक डे' मनाया, News18 की रिपोर्ट के अनुसार। UDF का कहना है कि जब केंद्र ईंधन क़ीमतें कम कर रहा है, तो राज्य सरकार टैक्स बढ़ाकर राहत छीन रही है।
इसका I.N.D.I.A गठबंधन पर क्या असर पड़ेगा?
यह विरोधाभास गठबंधन की संरचनात्मक कमज़ोरी उजागर करता है — दिल्ली में कांग्रेस और CPI-M साथ हैं, लेकिन केरल में एक-दूसरे के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं। BJP को इसे भुनाने का मौक़ा मिलता है बिना कुछ किए।
केरल में कांग्रेस और लेफ्ट की राजनीतिक लड़ाई कितनी पुरानी है?
केरल में दशकों से UDF (कांग्रेस नेतृत्व) और LDF (CPI-M नेतृत्व) के बीच द्विध्रुवीय राजनीति चलती है। दोनों मोर्चे बारी-बारी सत्ता में आते हैं और विपक्ष में एक-दूसरे को कोई जगह नहीं देते।








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