दिल्ली की अदालत ने 2020 दिल्ली दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को दोषी करार दिया। शव पर 52 चाकू के निशान, ताहिर की छत से मिले पत्थर-पेट्रोल बम और गवाहों की गवाही ने फैसले की नींव रखी। छह अन्य आरोपियों को बरी किया गया।
बावन चाकू के वार। एक शव जो नाले में तैर रहा था। और एक छत — जो गोला-बारूद के गोदाम में बदल चुकी थी। यही वह तस्वीर है जिसने दिल्ली की अदालत को यह कहने पर मजबूर किया कि पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन 'निर्दोष' नहीं हैं — वे IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के दोषी हैं। ताहिर हुसैन समेत पाँच लोगों को दोषी करार दिया गया, जबकि छह आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
यह फैसला सिर्फ एक कोर्ट ऑर्डर नहीं — यह 2020 के दिल्ली दंगों का वह अध्याय है जिसने एक राजनीतिक दल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए और एक परिवार को पाँच साल से ज़्यादा इंसाफ़ के लिए तड़पाया।
वह रात जब चाँद बाग ने अंकित को निगल लिया
25 फरवरी 2020, उत्तर-पूर्वी दिल्ली। CAA विरोधी प्रदर्शनों की आग पहले ही सड़कों पर थी। TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार, अंकित शर्मा उस शाम अपने घर लौट रहे थे जब चाँद बाग इलाके में उन्हें भीड़ ने घेर लिया। अगली सुबह उनका शव पास के नाले से बरामद हुआ — शरीर पर 52 चाकू के घाव थे।
एक IB कर्मचारी — जो ख़ुफ़िया एजेंसी के लिए काम करता था — की इतनी बर्बर हत्या ने दिल्ली दंगों को एक नया और ख़ौफ़नाक आयाम दे दिया। यह अब सड़क की झड़प नहीं रही थी — यह संगठित हिंसा का चेहरा बन चुकी थी।
छत पर जो मिला, वह बदल गया पूरा केस
ताहिर हुसैन AAP के पार्षद थे — एक जनप्रतिनिधि जिनसे उम्मीद थी कि वे शांति बनाए रखेंगे। लेकिन Zee News की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को ताहिर के घर की छत पर हमले का 'कंट्रोल रूम' मिला — पत्थरों का जखीरा, पेट्रोल बम, गुलेलें, और दंगे में इस्तेमाल होने वाला सामान। गवाहों ने अदालत को बताया कि इसी छत से भीड़ पर निर्देश दिए जा रहे थे और पत्थर-बम फेंके जा रहे थे।
News18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, फोरेंसिक जाँच ने भी ताहिर के ख़िलाफ़ सबूत जुटाए। अदालत ने तीन प्रमुख बिंदुओं को निर्णायक माना: पहला, छत से बरामद हथियार और आपत्तिजनक सामग्री; दूसरा, चश्मदीद गवाहों की गवाही जिन्होंने ताहिर और उनके साथियों को भीड़ का नेतृत्व करते देखा; और तीसरा, अंकित शर्मा के शव पर मिले 52 चाकू के घाव — जो फोरेंसिक रिपोर्ट में सामूहिक और पूर्व नियोजित हमले की ओर इशारा करते थे।
केस फाइल
दिल्ली की सियासी गलियारों में यह बात दबी ज़ुबान में कही जाती रही कि ताहिर हुसैन का केस AAP के लिए एक 'टाइम बम' था। पार्टी ने शुरुआत में ताहिर को निलंबित कर दूरी बनाई, लेकिन विपक्ष — ख़ासकर BJP — ने इसे AAP की राजनीति के 'असली चेहरे' के रूप में पेश किया। ट्रेड हलकों में चर्चा यह भी है कि इस फैसले का सीधा असर दिल्ली नगर निगम की राजनीति और आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा। AAP की ओर से इस फैसले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक हलकों की अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
पाँच साल, ग्यारह आरोपी, और एक परिवार का इंतज़ार
प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस केस में कुल 11 आरोपी थे। अदालत ने 5 को दोषी और 6 को बरी किया। अंकित शर्मा के भाई ने फैसले के बाद कहा कि परिवार को आख़िरकार न्याय मिला — हालाँकि इसमें पाँच साल से ज़्यादा का वक़्त लगा। ABP News ने भी अंकित के परिवार की प्रतिक्रिया को विस्तार से कवर किया।
इस केस की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अंकित शर्मा ख़ुद एक सरकारी ख़ुफ़िया एजेंसी के कर्मचारी थे — जो देश की सुरक्षा के लिए काम करते थे। उनकी हत्या इस बात का सबूत बनी कि दंगों में कोई सुरक्षित नहीं था — न आम नागरिक, न सरकारी मुलाज़िम।
फैसले के आगे: अब क्या होगा?
इंडिया हेराल्ड का यह मानना है कि यह फैसला दिल्ली दंगों के बाकी लंबित केसों के लिए एक अहम न्यायिक मिसाल बन सकता है। ताहिर हुसैन की सज़ा का ऐलान अभी बाकी है — अदालत अगली तारीख़ पर सज़ा सुनाएगी। TV9 भारतवर्ष के अनुसार, दोषी पक्ष ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है।
लेकिन असली सवाल यह है: क्या यह फैसला दिल्ली दंगों की उस गहरी ज़ख़्म को भरेगा — या सिर्फ एक और अध्याय जोड़ेगा उस कहानी में जो अभी पूरी लिखी नहीं गई है? जब एक जनप्रतिनिधि की छत से दंगे का संचालन हो, तो सवाल सिर्फ सज़ा का नहीं — सिस्टम का है। वह सिस्टम जो ऐसे लोगों को टिकट देता है, जो उन्हें जनता का प्रतिनिधि बनाता है — उसके गिरेबान में कौन झाँकेगा?
आरोप जो यहाँ रिपोर्ट किए गए हैं, वे नामित स्रोतों से लिए गए हैं और जब तक अदालत का अंतिम आदेश नहीं आ जाता, अपील की प्रक्रिया जारी रह सकती है; सब-ज्यूडिस मामलों को बिना पूर्वाग्रह के रिपोर्ट किया गया है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
More from India Herald
मुख्य बातें
- दिल्ली अदालत ने 2020 दिल्ली दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 को दोषी करार दिया, 6 बरी (प्रभात खबर)
- अंकित शर्मा के शव पर 52 चाकू के घाव मिले थे — फोरेंसिक ने सामूहिक और पूर्वनियोजित हमले की पुष्टि की (TV9 भारतवर्ष)
- ताहिर हुसैन की छत से पत्थर, पेट्रोल बम और दंगाई सामग्री बरामद हुई — अदालत ने इसे 'कंट्रोल रूम' के तौर पर देखा (Zee News)
- सज़ा का ऐलान अगली तारीख़ पर होगा; दोषी पक्ष ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है (TV9 भारतवर्ष)
- AAP ने ताहिर को शुरुआत में निलंबित किया था, लेकिन पार्टी पर सवाल आज भी बरकरार (News18)
आँकड़ों में
- अंकित शर्मा के शव पर 52 चाकू के वार मिले (TV9 भारतवर्ष)
- 11 आरोपियों में से 5 दोषी, 6 बरी (प्रभात खबर)
- घटना 25-26 फरवरी 2020 को हुई, फैसला 2026 में — न्याय में 5 साल से अधिक का समय लगा (News18, TV9 भारतवर्ष)
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपी (TV9 भारतवर्ष, प्रभात खबर)
- क्या: IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार (TV9 भारतवर्ष)
- कब: फैसला 2026 में आया; घटना 25-26 फरवरी 2020 को दिल्ली दंगों के दौरान हुई (News18)
- कहाँ: उत्तर-पूर्वी दिल्ली का चाँद बाग इलाका और दिल्ली की अदालत (TV9 भारतवर्ष)
- क्यों: अदालत ने पाया कि ताहिर हुसैन की छत से हमले का संचालन किया गया और उनके घर से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई (Zee News)
- कैसे: ताहिर की छत से पत्थर, पेट्रोल बम फेंके गए; अंकित शर्मा पर 52 चाकू के वार हुए; शव नाले से बरामद हुआ — फोरेंसिक, गवाहों की गवाही और बरामदगी के आधार पर अदालत ने दोषी ठहराया (TV9 भारतवर्ष, प्रभात खबर)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ताहिर हुसैन को किस केस में दोषी ठहराया गया?
दिल्ली अदालत ने 2020 दिल्ली दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया। ताहिर AAP के पूर्व पार्षद हैं। (TV9 भारतवर्ष, प्रभात खबर)
अंकित शर्मा की हत्या कैसे हुई थी?
25 फरवरी 2020 को चाँद बाग इलाके में भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया। अगली सुबह उनका शव नाले से बरामद हुआ — शरीर पर 52 चाकू के वार थे। फोरेंसिक रिपोर्ट में सामूहिक और पूर्वनियोजित हमले की पुष्टि हुई। (TV9 भारतवर्ष)
ताहिर हुसैन की छत से क्या बरामद हुआ था?
Zee News के अनुसार, ताहिर हुसैन के घर की छत से पत्थरों का जखीरा, पेट्रोल बम, गुलेलें और दंगाई सामग्री बरामद हुई। अदालत ने इसे हमले के 'कंट्रोल रूम' के रूप में माना।
इस केस में कितने आरोपी थे और कितने दोषी हुए?
कुल 11 आरोपी थे। अदालत ने ताहिर हुसैन समेत 5 को दोषी ठहराया और 6 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। (प्रभात खबर)
ताहिर हुसैन को अब कितनी सज़ा हो सकती है?
दोषी करार के बाद सज़ा का ऐलान अगली तारीख़ पर होगा। हत्या के दोष में उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है। दोषी पक्ष ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है। (TV9 भारतवर्ष)





click and follow Indiaherald WhatsApp channel