EPFO के पुराने सिस्टम से नए CITES प्लेटफ़ॉर्म पर डेटा माइग्रेशन के दौरान तकनीकी खामियों ने लाखों सदस्यों के PF एडवांस, पेंशन और ट्रांसफ़र क्लेम रोक दिए हैं। Free Press Journal के अनुसार सोशल मीडिया पर सदस्य 'मेरे मरने के बाद क्लेम दोगे?' जैसी टिप्पणियाँ कर रहे हैं। फ़िलहाल ग्रीवांस पोर्टल और EPFO हेल्पलाइन ही राहत के रास्ते हैं।
एक आदमी की पत्नी अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टर ने कहा — ऑपरेशन ज़रूरी है, पाँच लाख का ख़र्चा। उसने सोचा, PF में तो पैसा है, एडवांस निकाल लूँगा। क्लेम डाला — और स्क्रीन पर लिखा आया: 'Under Process'। दो हफ़्ते, तीन हफ़्ते, एक महीना। कोई जवाब नहीं। आख़िर उसने सोशल मीडिया पर लिखा: 'क्या मेरे मरने के बाद क्लेम दोगे?'
यह किसी एक शख़्स की कहानी नहीं है। Free Press Journal की रिपोर्ट के अनुसार, EPFO के नए CITES (Centralized IT Enabled System) प्लेटफ़ॉर्म पर माइग्रेशन के बाद से सोशल मीडिया पर ऐसी सैकड़ों चीख़ें गूँज रही हैं — पेंशन रुकी, ट्रांसफ़र फँसा, एडवांस रिजेक्ट। वो पैसा जो सरकार कहती है 'आपकी सुरक्षा' के लिए है, ठीक उसी वक़्त पहुँच से बाहर हो गया जब उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
मामला समझिए। EPFO ने दशकों से अपने 34 करोड़ से ज़्यादा सदस्यों का डेटा अलग-अलग रीजनल ऑफ़िसों के पुराने सॉफ़्टवेयर पर रखा था — कहीं FoxPro जैसे ज़माने के प्रोग्राम पर, कहीं बिखरी एक्सेल शीट्स पर। EPFO 2.0 के तहत इसे एक सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम CITES पर लाने का फ़ैसला किया गया — मक़सद था कि आपका UAN कहीं भी हो, क्लेम मिनटों में प्रोसेस हो। सुनने में शानदार। लेकिन जब करोड़ों पुराने रिकॉर्ड्स नए सिस्टम में डाले गए, तो जो हुआ वह किसी भी IT प्रोफ़ेशनल को हैरान नहीं करेगा — डेटा मिसमैच।
कहीं पुराने रिकॉर्ड में नाम 'राजेश कुमार' है और आधार में 'राजेश कुमार शर्मा'। कहीं जन्मतिथि में एक अंक का फ़र्क़ है। कहीं पिछली कंपनी ने सर्विस डिटेल ग़लत डाली थी — दस साल पहले, जब किसी ने ध्यान नहीं दिया। नया सिस्टम ऑटोमैटिक वेरिफ़ाई करता है, और जहाँ भी मामूली-सी बेमेल दिखी, उसने क्लेम रोक दिया — या सीधे रिजेक्ट कर दिया। [EMBED-SUGGESTION:tweet]
अब ज़रा सोचिए — जिस आदमी को पैसे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, उसे बताया जा रहा है कि उसके अपने रिकॉर्ड में 'तकनीकी गड़बड़ी' है। वह EPFO ऑफ़िस जाता है, वहाँ कहा जाता है 'सिस्टम में अटका है, हम कुछ नहीं कर सकते'। हेल्पलाइन पर फ़ोन करो तो घंटों होल्ड पर रहो। ग्रीवांस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करो तो ऑटो-जेनरेटेड जवाब आता है। सोशल मीडिया पर X (पूर्व में Twitter) पर ट्वीट करो तो शायद कोई ध्यान दे — और यही वजह है कि अब यह ट्रेंड बन गया है।
एक यूज़र ने लिखा: 'बीवी के इलाज के लिए PF एडवांस का क्लेम तीन बार रिजेक्ट हुआ — हर बार नई वजह।' दूसरे ने लिखा: 'रिटायर हो गया, पेंशन का क्लेम दो महीने से अटका है — खाने के पैसे नहीं हैं।' Free Press Journal की रिपोर्ट बताती है कि ये शिकायतें अलग-थलग नहीं हैं — माइग्रेशन के बाद क्लेम प्रोसेसिंग का औसत समय काफ़ी बढ़ गया है, और रिजेक्शन रेट में उछाल आया है।
EPFO की तरफ़ से अब तक कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से इस पैमाने की समस्या को स्वीकार करता नहीं दिखा है। संगठन ने पहले कहा था कि CITES से क्लेम प्रोसेसिंग तेज़ होगी और 'ऑटो मोड' में सेटलमेंट होगा। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि ऑटोमेशन तभी काम करता है जब डेटा साफ़ हो — और दशकों की लापरवाही से भरे डेटा को रातोंरात साफ़ नहीं किया जा सकता।
इंडिया हेराल्ड का विश्लेषण यह है कि यह गड़बड़ी महज़ एक 'IT ग्लिच' नहीं है — यह दशकों की संस्थागत लापरवाही का बिल है जो अब एक साथ आ गया है। जब तक रीजनल ऑफ़िस अलग-अलग चलते थे, डेटा की ग़लतियाँ छिपी रहती थीं — क्योंकि मैनुअल प्रोसेसिंग में कोई क्लर्क नाम में फ़र्क़ देखकर भी क्लेम पास कर देता था। अब मशीन ने वह लचीलापन छीन लिया है, और हर पुरानी ग़लती एक दीवार बन गई है। असल सवाल यह है: जिस व्यवस्था ने दशकों तक डेटा सही नहीं रखा, उसके 'डिजिटलाइज़ेशन' का ख़ामियाज़ा भुगतने वाला कौन है — वह कर्मचारी जिसने हर महीने ईमानदारी से PF कटवाया, या वह सिस्टम जिसने उसका रिकॉर्ड सँभालने में कोताही बरती?
अगर आपका क्लेम फँसा है तो अभी यह करें
1. EPFO ग्रीवांस पोर्टल (EPFiGMS): epfigms.gov.in पर जाकर शिकायत दर्ज करें — UAN नंबर और क्लेम रेफ़रेंस नंबर साथ रखें। शिकायत का ट्रैकिंग नंबर नोट करें।
2. EPFO हेल्पलाइन: 1800-118-005 (टोल-फ़्री) पर कॉल करें। लाइन व्यस्त मिले तो बार-बार ट्राई करें — सुबह 10 बजे के तुरंत बाद कनेक्ट होने की संभावना ज़्यादा रहती है।
3. EPFO के X (Twitter) हैंडल @socialaboratepfo पर ट्वीट करें: अपना UAN, क्लेम टाइप और शिकायत नंबर लिखें। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक शिकायत पर जवाब मिलने की दर अनुभवतः ज़्यादा रही है।
4. क्षेत्रीय EPFO कार्यालय जाएँ: अपना UAN, आधार, पैन, बैंक पासबुक और पिछली कंपनियों के सर्विस सर्टिफ़िकेट लेकर जाएँ। अगर नाम या जन्मतिथि में मिसमैच है तो सुधार का आवेदन वहीं दें।
5. श्रम मंत्रालय को शिकायत: अगर 30 दिन में कोई जवाब न मिले, pgportal.gov.in पर केंद्रीय श्रम मंत्रालय को शिकायत करें — यह एक एस्केलेशन रूट है जो EPFO पर दबाव बनाता है।
आगे क्या होने वाला है?
अगर EPFO जल्द कोई बल्क डेटा करेक्शन मैकेनिज़्म या 'ग्रेस पीरियड' जारी नहीं करता जिसमें मामूली मिसमैच वाले क्लेम मैनुअल ओवरराइड से पास हों, तो यह समस्या और विकराल होगी। श्रम मंत्रालय पर संसद में सवाल उठने की संभावना है। और सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि अगर लोगों का भरोसा PF सिस्टम से उठ गया, तो कर्मचारी ऑप्ट-आउट का रास्ता खोजेंगे — और सोशल सिक्योरिटी का पूरा ढाँचा कमज़ोर होगा।
34 करोड़ खातों को एक छत के नीचे लाना ज़रूरी था। लेकिन किसी ने यह नहीं पूछा कि जब छत बन रही हो तो नीचे खड़े लोगों को बारिश से कौन बचाएगा? आपका PF आपकी गाढ़ी कमाई है — और अभी उस कमाई तक पहुँचने का रास्ता एक टूटी हुई सड़क से होकर जाता है। सवाल यह है: यह सड़क कब बनेगी — और तब तक कितने लोग बीच रास्ते में रुक जाएँगे?
आरोप और शिकायतें यहाँ नामित स्रोतों के हवाले से रिपोर्ट की गई हैं और जब तक अदालत का फ़ैसला न आए, अप्रमाणित मानी जाती हैं।
यह रिपोर्ट पत्रकारीय है, निवेश सलाह नहीं; बाज़ारों में जोखिम होता है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- EPFO के पुराने सिस्टम से नए CITES प्लेटफ़ॉर्म पर डेटा माइग्रेशन में नाम, जन्मतिथि और सर्विस डिटेल्स की बेमेल से लाखों क्लेम अटके या रिजेक्ट हुए हैं।
- सोशल मीडिया पर 'मेरे मरने के बाद क्लेम दोगे?' जैसी टिप्पणियाँ दर्शाती हैं कि सबसे ज़्यादा नुक़सान उन्हें हुआ जिन्हें मेडिकल या बेरोज़गारी जैसी इमरजेंसी में पैसा चाहिए था।
- यह गड़बड़ी महज़ IT ग्लिच नहीं — दशकों की डेटा लापरवाही का संचित बिल है जो डिजिटलाइज़ेशन ने एक साथ पेश कर दिया।
- फँसे क्लेम के लिए EPFiGMS पोर्टल, हेल्पलाइन 1800-118-005, X पर @socialaboratepfo, क्षेत्रीय कार्यालय और pgportal.gov.in एस्केलेशन — पाँच रास्ते उपलब्ध हैं।
- अगर EPFO जल्द बल्क डेटा करेक्शन या मैनुअल ओवरराइड मैकेनिज़्म नहीं लाया, तो PF सिस्टम पर भरोसे का संकट गहराएगा।
आँकड़ों में
- EPFO के 34 करोड़ से ज़्यादा सदस्यों का डेटा पुराने रीजनल सिस्टम से नए CITES प्लेटफ़ॉर्म पर माइग्रेट किया गया।
- Free Press Journal के अनुसार माइग्रेशन के बाद क्लेम रिजेक्शन और प्रोसेसिंग देरी में उल्लेखनीय उछाल आया है।
- EPFO हेल्पलाइन 1800-118-005 टोल-फ़्री उपलब्ध है — सुबह 10 बजे के बाद कनेक्ट होने की संभावना ज़्यादा बताई जाती है।
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: EPFO के करोड़ों सक्रिय सदस्य — ख़ासकर वे जिन्होंने मेडिकल, हाउसिंग या नौकरी छूटने पर इमरजेंसी PF क्लेम दाख़िल किया है।
- क्या: EPFO के पुराने सिस्टम से नए CITES (Centralized IT Enabled System) पर डेटा माइग्रेशन के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों से लाखों क्लेम अटक गए या रिजेक्ट हो गए।
- कब: 2026 में EPFO 2.0 और CITES प्लेटफ़ॉर्म रोलआउट के बाद, जुलाई 2026 तक शिकायतें चरम पर।
- कहाँ: पूरे भारत में — सोशल मीडिया (X/Twitter) पर देशव्यापी शिकायतें, EPFO के क्षेत्रीय कार्यालयों में भीड़।
- क्यों: दशकों पुराने रीजनल डेटाबेस से एक सेंट्रलाइज़्ड प्लेटफ़ॉर्म पर माइग्रेशन में डेटा मिसमैच, UAN-आधार लिंकिंग त्रुटियाँ और सर्वर लोड से क्लेम प्रोसेसिंग ठप हुई।
- कैसे: माइग्रेशन में पुराने रिकॉर्ड्स (नाम, जन्मतिथि, सर्विस डिटेल) नए सिस्टम से मैच नहीं हुए, जिससे ऑटोमैटिक वेरिफ़िकेशन फ़ेल हुआ और क्लेम 'अंडर प्रोसेस' में अटक गए या ऑटो-रिजेक्ट हो गए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
EPFO CITES माइग्रेशन क्या है और क्लेम क्यों अटक रहे हैं?
EPFO ने अपने पुराने रीजनल डेटाबेस को एक सेंट्रलाइज़्ड CITES प्लेटफ़ॉर्म पर माइग्रेट किया है। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड्स (नाम, जन्मतिथि, सर्विस डिटेल) और नए सिस्टम के डेटा में बेमेल होने से ऑटोमैटिक वेरिफ़िकेशन फ़ेल हो रहा है, जिससे क्लेम 'अंडर प्रोसेस' में अटक रहे हैं या रिजेक्ट हो रहे हैं।
अगर मेरा EPFO क्लेम माइग्रेशन के बाद अटक गया है तो क्या करूँ?
पाँच रास्ते हैं: (1) EPFiGMS पोर्टल (epfigms.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें, (2) हेल्पलाइन 1800-118-005 पर कॉल करें, (3) X पर @socialaboratepfo को ट्वीट करें, (4) क्षेत्रीय EPFO कार्यालय जाकर डेटा करेक्शन का आवेदन दें, (5) 30 दिन में जवाब न मिले तो pgportal.gov.in पर श्रम मंत्रालय को शिकायत करें।
EPFO माइग्रेशन गड़बड़ी कब तक ठीक होगी?
EPFO ने अभी तक इस पैमाने की समस्या को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है और कोई समयसीमा नहीं दी है। जब तक बल्क डेटा करेक्शन या मैनुअल ओवरराइड मैकेनिज़्म नहीं आता, प्रभावित सदस्यों को शिकायत और एस्केलेशन के रास्तों पर निर्भर रहना होगा।





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