NEET 2026 को लेकर करोड़ों छात्रों और अभिभावकों में बेचैनी है। पिछले साल के पेपर लीक विवाद के बाद NTA पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, नए सुधारों के वादे और फिर भी बने हुए सवाल — यह परीक्षा अब सिर्फ़ मेडिकल एंट्रेंस नहीं, भारत के पूरे शिक्षा तंत्र का आईना बन चुकी है।

कोटा की एक गली में 17 साल का लड़का सुबह चार बजे उठता है। उसकी माँ ने ज़मीन गिरवी रखी है। बाप ने कर्ज़ लिया है। और वह लड़का एक ऐसी परीक्षा की तैयारी कर रहा है जिसमें 24 लाख बच्चे बैठेंगे और सीटें हैं एक लाख के आसपास। यह NEET है — भारत का सबसे बड़ा मेडिकल एंट्रेंस, और शायद सबसे बड़ा सामाजिक प्रेशर कुकर।

अभी इस वक़्त 'NEET' गूगल पर सबसे ज़्यादा सर्च होने वाले शब्दों में है। वॉल्यूम 20,000 से ऊपर। लेकिन लोग सिर्फ़ एग्ज़ाम डेट या सिलेबस नहीं खोज रहे — वे जवाब खोज रहे हैं कि क्या यह सिस्टम उनके बच्चों के साथ इंसाफ़ करेगा या नहीं।

पेपर लीक का ज़ख़्म अभी हरा है

2025 का NEET-UG भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक काला अध्याय बनकर रह गया। बिहार पुलिस ने पेपर लीक रैकेट का पर्दाफ़ाश किया, CBI ने जाँच की, सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में 67 से अधिक लोग पेपर लीक के सिलसिले में गिरफ़्तार हुए। सुप्रीम कोर्ट ने NTA के पुनर्गठन का निर्देश दिया और कहा कि परीक्षा की पवित्रता पर कोई समझौता नहीं होगा।

लेकिन सवाल सिर्फ़ पेपर लीक का नहीं है। PTI के अनुसार, NTA ने 2026 के लिए कई 'सुधार' घोषित किए हैं — बहुस्तरीय सुरक्षा, CCTV निगरानी, रैंडमाइज़्ड सीटिंग। सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन जो बुनियादी ढाँचागत गड़बड़ी है — एक ही दिन, एक ही शिफ़्ट, एक ही पेपर, 24 लाख बच्चों के लिए — वह जस की तस है।

इनसाइड टॉक

शिक्षा जगत के हलकों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि NTA के भीतर ही एक गुट कंप्यूटर-बेस्ड अडैप्टिव टेस्टिंग (CBT) की वकालत कर रहा था, लेकिन राजनीतिक दबाव में OMR-आधारित ऑफ़लाइन परीक्षा जारी रखी गई। ट्रेड विश्लेषकों का अनुमान है कि कोचिंग इंडस्ट्री — जिसका टर्नओवर ₹50,000 करोड़ से ऊपर बताया जाता है — ने CBT मॉडल का विरोध किया क्योंकि इससे उनका 'गारंटीड रिज़ल्ट' वाला बिज़नेस मॉडल ध्वस्त हो जाता। फ़ैन्स और छात्रों के बीच यह मूड है कि सरकार असली सुधार नहीं चाहती, बस हर साल 'बैंड-एड' लगाकर काम चलाती है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

₹50,000 करोड़ की कोचिंग मशीन — असली विजेता कौन?

NEET को समझना हो तो पहले कोटा को समझिए। KOTA — जहाँ हर साल लाखों बच्चे डॉक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं और जहाँ छात्र आत्महत्या की ख़बरें अब 'सामान्य' मानी जाने लगी हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में छात्र आत्महत्याओं में 4% की बढ़ोतरी दर्ज हुई — और इसमें बड़ा हिस्सा प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव से जुड़ा था।

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश में कुल MBBS सीटें लगभग 1,12,000 हैं। 24 लाख आवेदक। मतलब सक्सेस रेट 5% से भी कम। यह IIT-JEE से भी कठिन अनुपात है। और इस 5% में से भी बड़ा हिस्सा उन बच्चों का है जिनके परिवार ₹3-5 लाख सालाना कोचिंग फ़ीस दे सकते हैं। गाँव का वह बच्चा जो सरकारी स्कूल में पढ़ा है — उसके लिए यह 'समान अवसर' की परीक्षा कहाँ है?

NEP 2020 के छठे साल में 10 लाख शिक्षक पद खाली हैं — जब मदरबोर्ड ही गायब हो तो चिप कहाँ लगेगी? NEET का संकट इसी बड़े शिक्षा संकट का एक लक्षण है।

सुधार हुए या सिर्फ़ घोषणाएँ?

शिक्षा मंत्रालय ने NTA के पुनर्गठन की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में स्पष्ट कहा कि एक स्थायी, स्वतंत्र परीक्षा निकाय बनाया जाए। लेकिन इंडिया हेराल्ड का आकलन यह है कि जब तक NEET को मल्टी-सेशन, मल्टी-डे फ़ॉर्मेट में नहीं बदला जाता — जैसा कि अमेरिका का MCAT या ब्रिटेन का UCAT है — तब तक एक ही दिन, एक ही पेपर, 4,000+ सेंटरों पर पेपर की सुरक्षा की गारंटी देना लगभग असंभव है। यह तकनीकी सच है जिसे कोई राजनेता स्वीकार नहीं करना चाहता।

PTI के अनुसार, सरकार ने 2026 से हाइब्रिड मॉडल पर 'विचार' करने की बात कही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नोटिफ़िकेशन नहीं आया है। छात्र संगठनों ने इसे 'चुनावी जुमला' करार दिया है।

आगे क्या — 2026 में क्या बदलेगा, क्या नहीं

अगर मौजूदा ट्रेंड देखें तो 2026 का NEET उसी OMR-आधारित सिंगल-डे फ़ॉर्मेट में होगा। NTA की वेबसाइट पर अभी तक जो इनफ़ॉर्मेशन बुलेटिन है, वह यही इशारा करता है। सुधार ज़्यादातर 'सुरक्षा' में होंगे — पेपर डिलीवरी चेन, बायोमेट्रिक वेरिफ़िकेशन — लेकिन परीक्षा का बुनियादी ढाँचा नहीं बदलेगा।

इसका मतलब यह है कि कोचिंग इंडस्ट्री और मज़बूत होगी। KOTA, हैदराबाद, दिल्ली, पटना के कोचिंग सेंटर और भी महंगे पैकेज बेचेंगे। और वह 17 साल का लड़का जिसकी माँ ने ज़मीन गिरवी रखी है — वह इस साल भी सुबह चार बजे उठेगा, इस उम्मीद में कि शायद इस बार सिस्टम उसके साथ धोखा नहीं करेगा।

असली सवाल यह नहीं है कि NEET 2026 का पेपर लीक होगा या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या एक देश 24 लाख बच्चों का पूरा भविष्य, एक दिन, तीन घंटे, 200 सवालों पर दाँव पर लगा सकता है — और फिर इसे 'मेरिट' कह सकता है?

Reported and written with AI assistance under India Herald's editorial standards; a human editor governs publication.

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मुख्य बातें

  • NEET-UG में हर साल 24 लाख+ छात्र आवेदन करते हैं जबकि MBBS सीटें लगभग 1,12,000 — सक्सेस रेट 5% से भी कम है।
  • 2025 के पेपर लीक में CBI जाँच और 67+ गिरफ़्तारियाँ हुईं; सुप्रीम कोर्ट ने NTA के पुनर्गठन का निर्देश दिया।
  • कोचिंग इंडस्ट्री का अनुमानित टर्नओवर ₹50,000 करोड़+ — जब तक मल्टी-सेशन फ़ॉर्मेट नहीं आता, यह मशीन और मज़बूत होती जाएगी।

आँकड़ों में

  • NEET-UG में 24 लाख+ आवेदक बनाम लगभग 1,12,000 MBBS सीटें — सक्सेस रेट 5% से कम (शिक्षा मंत्रालय)
  • 2024-25 में NEET पेपर लीक के सिलसिले में 67+ गिरफ़्तारियाँ (शिक्षा मंत्रालय रिपोर्ट)
  • NCRB 2024 के अनुसार छात्र आत्महत्याओं में 4% बढ़ोतरी — बड़ा हिस्सा प्रतियोगी परीक्षा दबाव से जुड़ा
  • भारत की कोचिंग इंडस्ट्री का अनुमानित टर्नओवर ₹50,000 करोड़ से ऊपर

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