जावेद अख्तर ने कहा कि आप आम हिन्दुस्तानी से कैसे पूछोगो कि वह हिन्दुस्तानी है। आदिवासी, दलित और गरीब के पास यदि प्रमाण नहीं है तो सरकार उन्हें कहां भगा देगी। इन लोगों ने सरकार को वोट दिया है। वोट लेते समय पूछते उनके वोटर की नागरिकता है कि नहीं। नागरिकता कानून के दायरे में लाकर सरकार कितने लोगों को बाहर निकालेगी। क्या सरकार के पास 10-12 करोड़ की आबादी को डिटेंशन सेंटर में रखने की जगह है।
बीते दिनों इतिहासकार रामचंद्र गुहा की गिफ्तारी पर जावेद अख्तर ने ट्वीट कर कहा था, 'मैं महान बुद्धिजीवी माननीय रामचंद्र गुहा की गिरफ्तारी का विरोध करता हूं। यह महान भारत देश संकीर्ण राजनीतिक विचारों से ऊपर है। कुछ लोग सहमत नहीं हो सकते लेकिन उनकी आवाज को खामोश करने की कोशिश राष्ट्रीय शर्म है। हम कहां जा रहे हैं?'