नीतीश कुमार और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव बिहार में सत्ता के साझीदार के बीच यूं तो काफी बातचीत होती है| नीतीश ने पिछले हफ्ते शुक्रवार को आरजेडी प्रमुख से पूछा कि उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता के माध्यम की जा रही शराबबंदी की कटु आलोचना में क्या उनकी खुद की चिंता झलकती है| लालू यादव ने इसके बाद कहा, "शराबबंदी राज्य में अब तक हुई सबसे अच्छी चीज़ है|"
इसके साथ ही उन्होंने कहा, "हर कोई जानता है कि राज्य भर में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल रहा है, लेकिन यहां कुछ लोग हैं, जो जलन के मारे इस तरह के मतभेद पैदा करना चाहते हैं|" रघुवंश प्रसाद सिंह की तरफ लालू का इशारा था, जिन्होंने कहा था कि मद्यनिषेध की नीति में नीतीश कुमार ने अति कर रखी है| मद्यनिषेध कानून को पहले से सख्त और कड़ा बना दिया गया है, जिसमें घर में शराब पाए जाने पर उस घर के सभी व्यस्क सदस्यों को दंडित करने का प्रावधान है|
नीतीश कुमार ने सीएम बनने के बाद शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया और अपने चुनावी वादे को अमल में लाए| उन्होंने लिखे एक लेख में कहा था कि "वे अपने रुख में कोई बदलाव नहीं लाएंगे और 'मद्यनिषेध कानून के सही क्रियांव्यन' को लेकर प्रतिबद्ध हैं|" लालू ने ने कहा कि "मुख्यमंत्री का फोन कॉल कोई आपसी 'विश्वास की कमी' नहीं दिखाती, बल्कि यह स्वाभाविक सी बात है, क्योंकि 'रघुवंश जी पार्टी के बड़े नेता हैं|"
लालू और नीतीश कुमार पिछला चुनाव साथ मिलकर लड़ने के फैसले से पहले तक रघुवंश प्रसाद सिंह कई बार नीतीश कुमार की आलोचना करते रहे थे| तब यह कहा जा रहा था कि गठबंधन में सीटों को लेकर जारी खींचतान के बीच रघुवंश द्वारा की जा रही उन टिप्पणियों को लालू का समर्थन प्राप्त है|