राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार शाम हुई हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस मीडिया को जानकारी दे रही है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें जेएनयू हिंसा से जुड़ा कुछ बड़ा एलान हो सकता है. जेएनयू कैंपस में हुई हिंसा में लेफ्ट और एबीवीपी दोनों ही पक्षों से जुड़े हुए छात्र घायल हुए.
दिल्ली पुलिस अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं कर पाई है, जिसको लेकर उसकी आलोचना हो रही है. विश्वविद्यालय परिसर में नकाबपोश हमलावरों के घुसकर छात्रों पर हमला करने को लेकर दिल्ली पुलिस दबाव में है. इस बीच दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि क्राइम ब्रांच ने 5 और संदिग्ध हमलावरों की पहचान कर ली है.
इन छात्रों की हुई पहचान
पुलिस ने कहा हमें व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाए गए। तीन और चार तारीख की घटना में सर्वर बंद होने के कारण नहीं मिला सीसीटीवी फुटेज। चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, आईशी घोष, सुचेता ताल्लुकदार, वास्कर विजय, प्रिया रंजन, योगेंद्र भारद्वाज(यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट के एडमिन), विकास पटेल, डोलन सामंता नाम के छात्रों की पुलिस ने पहचान की है। ये सभी तीन, चार और पांच तारीख की झड़प में शामिल थे।
इससे पहले पुलिस को तीन संदिग्ध हमलावरों के बारे में सुराग मिलने की बात सामने आई थी. माना जा रहा है कि पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ ठोस जानकारियां साझा कर सकती है. दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक संदिग्ध हमलावरों में से 4 लोग दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र हो सकते हैं. इसके अलावा एक संदिग्ध जेएनयू का पूर्व छात्र है.
दिल्ली पुलिस ने तीन केस दर्ज किए
दिल्ली पुलिस ने जेएनयू हिंसा मामले में कुल तीन केस दर्ज किए हैं। पहला- सर्वर रूम में तोड़फोड़, दूसरा- रजिस्ट्रेशन समर्थकों से मारपीट, तीसरा- हॉस्टल में घुसकर हमला। दिल्ली पुलिस की एफआईआर में अपना नाम आने पर जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष ने कहा है कि उनके पास भी सबूत है। नाम आने से कोई गुनहगार नहीं हो जाता।
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