टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ सलमान खान की 'मातृभूमि' अब 2027 तक टल सकती है, जिससे 2026 में उनकी कोई भी फ़िल्म रिलीज़ नहीं होगी। 'राजा शिवाजी' भी अभी शूटिंग स्टेज में है। यह बीस साल में पहला मौक़ा होगा जब भाईजान का साल ख़ाली गुज़रेगा।

बीस साल। बीस साल से भारतीय बॉक्स ऑफ़िस ने हर साल कम-से-कम एक सलमान खान फ़िल्म देखी है — ईद हो या क्रिसमस, भाईजान की एंट्री तय मानी जाती थी। लेकिन 2026 वह साल बनने जा रहा है जब सिंगल स्क्रीन से लेकर मल्टीप्लेक्स तक, सलमान का कोई पोस्टर नहीं लटकेगा। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ 'मातृभूमि' — जो 2026 की ईद के लिए सबसे बड़ा दांव मानी जा रही थी — अब 2027 तक खिसक सकती है।

और यह कोई मामूली शेड्यूल चेंज नहीं। यह बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद बॉक्स ऑफ़िस ब्रैंड का अचानक ग़ायब होना है — उस दौर में जब इंडस्ट्री को हर 'शुक्रवार' एक बड़े नाम की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है।

क्या हुआ 'मातृभूमि' को?

ज़ी न्यूज़ ने इंडिया डॉट कॉम के हवाले से रिपोर्ट किया कि 'मातृभूमि' की स्क्रिप्ट और प्रोडक्शन शेड्यूल अभी फ़ाइनल स्टेज पर नहीं पहुँचे हैं। तेलुगु360 की रिपोर्ट भी इसी बात की पुष्टि करती है कि फ़िल्म 2027 से पहले रिलीज़ होने की स्थिति में नहीं है। इसके अलावा सलमान की दूसरी अनाउंस्ड फ़िल्म 'राजा शिवाजी' भी अभी शूटिंग के शुरुआती दौर में बताई जा रही है, यानी उसका भी 2026 में आना लगभग असम्भव है।

नतीजा? दो दशकों में पहली बार एक पूरा कैलेंडर ईयर बिना सलमान खान के गुज़रेगा।

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री के गलियारों में जो बात सबसे ज़्यादा हो रही है वह यह नहीं कि फ़िल्म क्यों टली — बल्कि यह कि क्या सलमान ख़ुद चाहते हैं कि फ़िल्म अभी न आए। ट्रेड हलकों में चर्चा है कि हालिया दो-तीन सालों में बॉक्स ऑफ़िस पर जो पैटर्न बना है — जहाँ बड़े-बड़े स्टार्स के 'शुअर-शॉट हिट' फ़्लॉप हो गए — उसने सलमान की टीम को सोच में डाल दिया है। एक और बात जो फ़ैन्स के बीच घूम रही है: क्या 'टाइगर 3' और उसके बाद की मिली-जुली प्रतिक्रिया ने भाईजान को यह सिग्नल दिया कि बिना पक्की स्क्रिप्ट के अब सिर्फ़ नाम पर फ़िल्म नहीं चलेगी?

फ़ैन्स मानते हैं कि सलमान ने 'बजरंगी भाईजान' के बाद से कोई ऐसी फ़िल्म नहीं दी जिसने क्रिटिक्स और ऑडियंस दोनों को एक साथ जीता हो। सोशल मीडिया पर अटकलें ज़ोरों पर हैं कि यह देरी दरअसल सलमान का 'क्वालिटी रीसेट' है — बार-बार आकर एवरेज फ़िल्में देने से बेहतर है कि एक बड़ी, तगड़ी फ़िल्म लेकर आओ।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

ईद स्लॉट की पॉलिटिक्स — ख़ाली सिंहासन पर नज़र किसकी?

बॉलीवुड में ईद का स्लॉट सालों से सलमान खान का पर्सनल ट्रेडमार्क रहा है। 'एक था टाइगर', 'बजरंगी भाईजान', 'सुलतान' — इन सबने ईद को 'सलमान-डे' बना दिया था। अब जब भाईजान 2026 में मैदान में नहीं हैं, ट्रेड विश्लेषकों का अनुमान है कि अक्षय कुमार, अजय देवगन या शाहरुख़ ख़ान कैम्प में से कोई इस गोल्डन विंडो पर दांव लगा सकता है।

लेकिन इंडिया हेराल्ड का आकलन यह है कि यह स्थिति जितनी सरल दिखती है, उतनी है नहीं। सलमान की ग़ैरमौजूदगी सिर्फ़ एक स्लॉट ख़ाली नहीं करती — यह पूरे बॉक्स ऑफ़िस कैलेंडर का गुरुत्वाकर्षण बदल देती है। ईद पर सलमान की फ़िल्म आती थी तो बाक़ी प्रोड्यूसर्स उस हफ़्ते से बचते थे; अब वह 'नो-गो ज़ोन' अचानक 'फ़्री-फ़ॉर-ऑल' बन गया है। सवाल यह है: क्या कोई और स्टार उस ईद की भीड़ को खींच सकता है, या यह साबित हो जाएगा कि वह भीड़ सलमान के नाम पर आती थी, किसी भी ईद-रिलीज़ के नाम पर नहीं?

दो दशक की लकीर टूटने का मतलब

संख्याओं की भाषा में समझें तो सलमान ने पिछले बीस सालों में कम-से-कम बीस ईद या फ़ेस्टिवल रिलीज़ दी हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की इसी रिपोर्ट में 'राजा शिवाजी' का ज़िक्र है — जो प्रोडक्शन के शुरुआती चरण में है और जिसकी 2026 में आने की कोई सम्भावना फ़िलहाल नहीं दिखती। यानी सलमान के पास 2026 में रिलीज़ के लिए कोई तैयार प्रोजेक्ट ही नहीं है — यह सिर्फ़ 'मातृभूमि' के टलने का मामला नहीं, बल्कि पूरी पाइपलाइन ख़ाली होने की बात है।

बॉलीवुड के इतिहास में शाहरुख़ ख़ान ने भी कुछ साल का गैप लिया था — और 'पठान' के साथ जो वापसी हुई, उसने साबित किया कि कभी-कभी ग़ायब रहना सबसे बड़ी मार्केटिंग होती है। क्या सलमान भी यही दांव खेल रहे हैं? ट्रेड हलकों में एक तबका मानता है कि अगर 'मातृभूमि' सच में एक मज़बूत, कंटेंट-ड्रिवन फ़िल्म बनकर 2027 में आती है, तो इस गैप को 'कमबैक' का तगड़ा नैरेटिव मिल सकता है।

असली सवाल — डर या मास्टरप्लान?

यही वह जगह है जहाँ बात दिलचस्प होती है। सलमान के करियर में एक अजीब विरोधाभास है — वे बॉक्स ऑफ़िस के सबसे 'भरोसेमंद' नाम रहे हैं, लेकिन स्क्रिप्ट चुनने में सबसे ज़्यादा 'अनप्रेडिक्टेबल' भी। 'भाईजान' ब्रैंड की ताक़त यह है कि फ़ैन्स सलमान को देखने आते हैं, फ़िल्म को नहीं — लेकिन वही ताक़त कमज़ोरी बन जाती है जब फ़िल्म कमज़ोर निकले और दर्शक निराश लौटें।

अगर सलमान सच में 'क्वालिटी ओवर क्वांटिटी' का रास्ता चुन रहे हैं, तो 2026 का ख़ाली साल बॉलीवुड को एक बड़ा सन्देश देगा: सुपरस्टार सिस्टम अब 'गारंटीड फ़्राइडे' पर नहीं, बल्कि 'गारंटीड कंटेंट' पर टिकेगा। लेकिन अगर यह देरी सिर्फ़ प्रोडक्शन की अव्यवस्था है, तो 58 पार कर चुके सलमान के लिए हर गुज़रता साल उस 'एक्शन हीरो' इमेज को और मुश्किल बनाता जाएगा।

आने वाले महीनों में देखिए — 'मातृभूमि' का पहला लुक या शूटिंग अपडेट आता है या नहीं। अगर साल के अंत तक भी कोई ठोस अपडेट नहीं मिला, तो समझ लीजिए कि यह 'मास्टरप्लान' कम और 'प्रोजेक्ट ट्रबल' ज़्यादा है। और अगर ईद 2027 पर सलमान एक धमाकेदार ट्रेलर के साथ लौटते हैं — तो यह ख़ामोशी इतिहास की सबसे महँगी और सबसे चतुर मार्केटिंग साबित होगी।

बॉलीवुड का सबसे पुराना सवाल फिर ज़िंदा है: भाईजान को बॉक्स ऑफ़िस से ज़्यादा किसी चीज़ से डर लगता है — और वह है एक ग़लत फ़िल्म।

इस रिपोर्ट में दर्ज आरोप/अटकलें नामित स्रोतों के हवाले से हैं और जब तक कोई न्यायालय निर्णय न दे, अप्रमाणित हैं।

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मुख्य बातें

  • टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ सलमान खान की 'मातृभूमि' 2027 तक टल सकती है — 2026 में उनकी कोई फ़िल्म रिलीज़ नहीं होगी
  • 'राजा शिवाजी' भी प्रोडक्शन के शुरुआती चरण में है, यानी 2026 की पाइपलाइन पूरी तरह ख़ाली है
  • ईद का 'सलमान स्लॉट' पहली बार बिना भाईजान के रहेगा — ट्रेड में चर्चा है कि कौन सा स्टार इस गोल्डन विंडो पर दांव लगाएगा
  • पिछले 20 सालों में यह पहला मौक़ा होगा जब सलमान का पूरा साल बिना सिंगल रिलीज़ के गुज़रेगा
  • ट्रेड हलकों में अटकल है कि यह 'क्वालिटी रीसेट' है — शाहरुख़ की 'पठान' वाली कमबैक स्ट्रैटेजी की तर्ज़ पर

आँकड़ों में

  • बीस साल में पहली बार सलमान खान का पूरा कैलेंडर ईयर बिना किसी फ़िल्म रिलीज़ के गुज़रेगा — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
  • सलमान की दोनों अनाउंस्ड फ़िल्में — 'मातृभूमि' और 'राजा शिवाजी' — 2026 में रिलीज़ की स्थिति में नहीं हैं — टाइम्स ऑफ़ इंडिया/तेलुगु360

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