मद्रास हाईकोर्ट द्वारा मातृत्व अवकाश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया गया है। कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है कि अगर कामकाजी महिला पहली डिलीवरी में जुड़वा बच्चों के बाद दूसरी डिलीवरी में बच्चे को जन्म देती है, तो वह मातृत्व लाभ की हकदार नहीं है क्योंकि इसे तीसरे बच्चे के रूप में माना जाना चाहिए।
मौजूदा नियमों के अनुसार, एक महिला केवल अपने पहले दो प्रसवों के लिए इस तरह के लाभों का लाभ उठा सकती है। मुख्य न्यायाधीश ए पी साही और न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद सहित पहली पीठ ने गृह मंत्रालय से अपील की अनुमति देते हुए यह बात कही।
इसने एकल न्यायाधीश के 18 जून 2019 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसने तमिलनाडु सरकार के नौकरों को नियंत्रित करने वाले नियमों के तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की महिला सदस्य को 180 दिनों का मातृत्व अवकाश और अन्य लाभ दिए। यह मुद्दा मंत्रालय की ओर से दायर एक अपील से संबंधित था, जिसमें कहा गया था कि छुट्टी का दावा सीआईएसएफ के एक सदस्य द्वारा किया जाता है, जिस पर तमिलनाडु के मातृत्व नियम लागू नहीं होंगे।
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