राजौरी ज़िले में CCTV कैमरों पर दो संदिग्ध आतंकी कैद होने के बाद सुरक्षाबलों ने बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें इलाक़े की घेराबंदी कर रही हैं। यह घटना पीर पंजाल बेल्ट में लगातार बनी सुरक्षा चुनौती को फिर से रेखांकित करती है।
एक CCTV कैमरा। दो धुँधली आकृतियाँ। और कुछ ही घंटों में राजौरी की पहाड़ियों पर सैकड़ों जवान तैनात। यह दृश्य अगर आपको परिचित लग रहा है तो इसलिए क्योंकि यह पहली बार नहीं हो रहा — राजौरी-पुंछ बेल्ट पिछले दो साल से लगभग हर कुछ महीनों में इसी तरह ख़बरों में आती है। सवाल यह नहीं कि सर्च ऑपरेशन चला या नहीं — सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की टेक्नोलॉजी और बाड़ के बावजूद ये आकृतियाँ CCTV तक पहुँच कैसे रही हैं।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राजौरी ज़िले में स्थापित CCTV सर्विलांस नेटवर्क पर दो संदिग्ध हथियारबंद व्यक्ति कैद हुए। फुटेज की पुष्टि होते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त कॉर्डन-एंड-सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। इलाक़े के कई गाँवों को घेरे में लिया गया है और नाकाबंदी जारी है।
यह ऑपरेशन ऐसे वक़्त पर आया है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज़ चल रहे हैं। कुछ ही दिन पहले शोपियाँ में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के 'कैटेगरी ए' आतंकी ज़ाकिर गनी को एक संयुक्त ऑपरेशन में मार गिराया। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने इसे "बड़ी कामयाबी" बताया, और हिंदुस्तान टाइम्स ने इसे "भारतीय बलों की बड़ी जीत" करार दिया। शोपियाँ में ही इससे पहले एक बड़ा एंटी-टेरर ऑपरेशन चलाया गया था।
पीर पंजाल रेंज — वह 'ब्लाइंड स्पॉट' जो बंद नहीं हो रही
राजौरी-पुंछ की भौगोलिक स्थिति ही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। पीर पंजाल रेंज की ऊँची चोटियाँ, घने जंगल, दुर्गम रास्ते — यहाँ LoC पर पारंपरिक फेंसिंग कई जगह भौगोलिक कारणों से संभव ही नहीं है। बर्फ़बारी के मौसम में बाड़ क्षतिग्रस्त हो जाती है और गर्मी आते ही घुसपैठ के रास्ते खुल जाते हैं। इसीलिए सेना ने 'ऑपरेशन सर्प विनाश' (2003) से लेकर अनगिनत सर्च ऑपरेशन चलाए, लेकिन भूगोल वह दुश्मन है जिसे गोली से नहीं हराया जा सकता।
टेक्नोलॉजी ने एक अहम भूमिका निभाई है — इस बार CCTV ने संदिग्धों को स्पॉट किया, जो बताता है कि इंटेलिजेंस ग्रिड काम कर रहा है। लेकिन असली समस्या 'डिटेक्शन' से पहले की है: घुसपैठ रुक ही नहीं रही। राजौरी में हाल ही में LoC के ऊपर पाकिस्तानी ड्रोन भी स्पॉट किया गया — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार इसके बाद भी सर्च ऑपरेशन चलाना पड़ा। यानी ड्रोन से हथियार और सप्लाई गिराने का पैटर्न भी सक्रिय है।
पॉलिटिकल पल्स
राजौरी-पुंछ बेल्ट सिर्फ़ सैन्य मानचित्र पर नहीं, चुनावी नक़्शे पर भी संवेदनशील है। यह गुज्जर-बकरवाल बहुल इलाक़ा है — अनुसूचित जनजाति का दर्जा, आरक्षण की राजनीति, और विधानसभा चुनावों में इस बेल्ट की सीटें हमेशा से तय करती रही हैं कि जम्मू डिवीजन का रुख़ किस ओर जाएगा। सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि जब तक यह बेल्ट हर कुछ महीनों में सुर्ख़ियों में आती रहेगी, केंद्र सरकार का वह नैरेटिव कमज़ोर पड़ता रहेगा जो कहता है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कश्मीर में 'स्थायी शांति' आ गई है।
सच यह है कि घाटी (कश्मीर डिवीज़न) में आतंकी वारदातों में कमी आई है — शोपियाँ में ज़ाकिर गनी जैसे ऑपरेशन इसका सबूत हैं। लेकिन जम्मू डिवीज़न, ख़ासकर राजौरी-पुंछ, ने एक नया पैटर्न दिखाया है: कश्मीर में दबाव बढ़ने पर आतंकी नेटवर्क जम्मू की तरफ़ शिफ़्ट हो रहे हैं। यह 'वॉटरबेड इफ़ेक्ट' है — एक जगह दबाओ तो दूसरी जगह उभरता है।
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि राजौरी की यह घटना दो स्तरों पर पढ़ी जानी चाहिए। पहला — ऑपरेशनल: CCTV नेटवर्क ने काम किया, फ़ोर्सेज़ की प्रतिक्रिया तेज़ रही, और शोपियाँ जैसे हालिया एनकाउंटर बताते हैं कि ख़ुफ़िया तंत्र सक्रिय है। दूसरा — रणनीतिक: जब तक पीर पंजाल रेंज में घुसपैठ रोकने का कोई स्थायी तकनीकी-भौगोलिक समाधान नहीं मिलता, हर कुछ महीनों में ऐसे ऑपरेशन चलते रहेंगे, और हर ऑपरेशन '370 के बाद शांति' नैरेटिव पर एक और सवालिया निशान लगाएगा।
आगे क्या — वॉच लिस्ट
आने वाले हफ़्तों में देखने लायक तीन बातें हैं। पहला: क्या राजौरी सर्च ऑपरेशन एनकाउंटर में बदलता है — अगर ये दोनों संदिग्ध 'ताज़ी घुसपैठ' वाले निकले तो LoC सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठेंगे। दूसरा: पाकिस्तानी ड्रोन गतिविधि का पैटर्न — राजौरी में ड्रोन स्पॉटिंग और ज़मीनी घुसपैठ अगर एक साथ बढ़ रही है तो यह 'कॉम्बो टैक्टिक' है जिसे सेना को अलग रणनीति से काउंटर करना होगा। तीसरा: चुनावी कैलेंडर — जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारी के बीच राजौरी जैसी घटनाएँ विपक्ष को 'सुरक्षा विफलता' का हथियार देती हैं, और सत्ता पक्ष को 'ज़ीरो टॉलरेंस' ऑपरेशन की ज़रूरत।
एक बात साफ़ है: राजौरी का CCTV कैमरा जो दिखा रहा है वह सिर्फ़ दो संदिग्धों की तस्वीर नहीं — वह उस बड़ी तस्वीर का एक फ़्रेम है जिसमें पीर पंजाल की पहाड़ियाँ, LoC की कमज़ोर कड़ियाँ, बदलती आतंकी रणनीति, और दिल्ली की राजनीतिक मजबूरियाँ सब एक साथ नज़र आती हैं। सवाल वही है जो दो साल पहले भी था — इस ब्लाइंड स्पॉट को बंद करने की ज़िम्मेदारी किसकी है, और उसका जवाब कब आएगा?
इस रिपोर्ट में दर्ज आरोप और दावे संबंधित स्रोतों के हवाले से हैं और जब तक न्यायालय में सिद्ध न हों, अप्रमाणित माने जाएँ; न्यायालयीन विषय बिना पूर्वाग्रह के रिपोर्ट किए गए हैं।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- राजौरी में CCTV पर दो संदिग्ध आतंकी कैद हुए — सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों का संयुक्त सर्च ऑपरेशन जारी (टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- शोपियाँ में लश्कर के 'कैटेगरी ए' आतंकी ज़ाकिर गनी को मार गिराया गया — ख़ुफ़िया तंत्र सक्रिय लेकिन घुसपैठ का पैटर्न नहीं रुका (हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया)
- पीर पंजाल रेंज भौगोलिक कारणों से 'ब्लाइंड स्पॉट' बनी हुई है — LoC फेंसिंग कई जगह संभव नहीं, ड्रोन घुसपैठ भी सक्रिय
- कश्मीर डिवीज़न में दबाव बढ़ने पर आतंकी नेटवर्क जम्मू डिवीज़न (राजौरी-पुंछ) की ओर शिफ़्ट हो रहे हैं — 'वॉटरबेड इफ़ेक्ट'
- हर ऐसी घटना केंद्र सरकार के '370 के बाद शांति' नैरेटिव पर नया सवालिया निशान लगाती है
आँकड़ों में
- ऑपरेशन सर्प विनाश (2003) के बाद से राजौरी-पुंछ बेल्ट में दर्जनों बड़े सर्च ऑपरेशन चलाए जा चुके हैं — पैटर्न दो दशक पुराना है
- शोपियाँ में लश्कर-ए-तैयबा का 'कैटेगरी ए' आतंकी ज़ाकिर गनी हाल ही में मारा गया — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
- राजौरी के LoC सेक्टर में हाल ही में पाकिस्तानी ड्रोन भी स्पॉट किया गया — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें — टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार
- क्या: राजौरी में CCTV फुटेज में दो संदिग्ध आतंकी कैद हुए, जिसके बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया
- कब: जून 2026, ऑपरेशन जारी — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
- कहाँ: जम्मू-कश्मीर का राजौरी ज़िला, पीर पंजाल रेंज की तलहटी वाला इलाक़ा
- क्यों: CCTV सर्विलांस में संदिग्ध हथियारबंद व्यक्तियों की पहचान होने पर सुरक्षाबलों ने त्वरित कार्रवाई शुरू की — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
- कैसे: CCTV नेटवर्क ने संदिग्धों को स्पॉट किया, इसके बाद इलाक़े की कॉर्डन-एंड-सर्च ऑपरेशन से घेराबंदी की गई — टाइम्स ऑफ़ इंडिया
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजौरी में CCTV पर कितने संदिग्ध आतंकी दिखे?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजौरी में CCTV फुटेज पर दो संदिग्ध हथियारबंद व्यक्ति कैद हुए, जिसके बाद सेना और पुलिस ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
राजौरी-पुंछ बेल्ट बार-बार आतंकी घटनाओं का केंद्र क्यों बनती है?
पीर पंजाल रेंज की दुर्गम भौगोलिक स्थिति — ऊँची चोटियाँ, घने जंगल और LoC पर कई जगह फेंसिंग का अभाव — इस बेल्ट को घुसपैठ के लिए संवेदनशील बनाती है। कश्मीर में दबाव बढ़ने पर आतंकी जम्मू डिवीज़न की ओर शिफ़्ट भी हो रहे हैं।
क्या अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति आई है?
कश्मीर डिवीज़न में आतंकी वारदातों में कमी आई है — शोपियाँ जैसे एनकाउंटर इसका सबूत हैं। लेकिन जम्मू डिवीज़न, ख़ासकर राजौरी-पुंछ बेल्ट में घुसपैठ और सर्च ऑपरेशन जारी हैं, जो 'स्थायी शांति' के दावे पर सवाल उठाते हैं।
शोपियाँ में किस आतंकी को मारा गया?
टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार शोपियाँ में लश्कर-ए-तैयबा के 'कैटेगरी ए' आतंकी ज़ाकिर गनी को संयुक्त सुरक्षा ऑपरेशन में मार गिराया गया।


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