शिवम दुबे को 2026 में भारतीय टीम से लगातार बाहर रखा जा रहा है, जबकि IPL में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। BCCI के चयनकर्ता उन्हें फ़ील्डिंग और बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में भरोसेमंद नहीं मानते — यही असली वजह है।
पचास हज़ार लोग एक ही नाम खोज रहे हैं — शिवम दुबे। और वे स्कोरकार्ड नहीं, जवाब खोज रहे हैं। सवाल सीधा है: वह आदमी जिसने T20 वर्ल्ड कप 2024 में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ सुपर-8 में भारत की नैया पार लगाई, जिसके बल्ले से IPL में हर साल छक्कों की बारिश होती है — वह BCCI के चयनकर्ताओं की नज़र से इतना ओझल कैसे हो गया कि टीम शीट पर उसका नाम ही नहीं आता?
यह सिर्फ़ एक खिलाड़ी का किस्सा नहीं है। यह भारतीय क्रिकेट के उस बड़े सवाल की परत खोलता है जहाँ IPL का रिपोर्ट कार्ड और इंटरनेशनल का गेट-पास दो अलग दुनिया हैं — और बीच में फँसा खिलाड़ी सिर्फ़ तमाशा देखता रहता है।
IPL का राजा, इंटरनेशनल का अजनबी
शिवम दुबे का IPL रिकॉर्ड किसी भी पावर-हिटर से टक्कर लेता है। चेन्नई सुपर किंग्स के लिए मिडल-ऑर्डर में उनकी स्ट्राइक रेट लगातार 145-155 के बीच रही है। ESPNcricinfo के आँकड़ों के मुताबिक़ उन्होंने IPL 2024 में 396 रन बनाए थे — 30+ की औसत और 155 से ऊपर स्ट्राइक रेट। 2025 सीज़न में भी उनकी ताबड़तोड़ बैटिंग जारी रही। लेकिन जब इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हालिया T20I सीरीज़ की टीम घोषित हुई, दुबे का नाम कहीं नहीं था। भारत ने वह सीरीज़ जीती ज़रूर, पर दुबे बेंच पर भी नहीं थे — वे सिलेक्शन की दौड़ में थे ही नहीं।
चयनकर्ताओं की नज़र में 'अधूरा पैकेज'
BCCI की चयन समिति की प्राथमिकताओं को समझें तो तस्वीर साफ़ होती है। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कई मौक़ों पर यह संकेत दिया है कि T20I में ऑलराउंडर स्लॉट के लिए 'मल्टी-डायमेंशनल' खिलाड़ी चाहिए — यानी बल्ले से रन, गेंद से विकेट, और फ़ील्ड पर चुस्ती। दुबे इस तिकड़ी में से सिर्फ़ पहला बॉक्स पूरी ताक़त से टिक करते हैं।
उनकी स्लो लेफ़्ट-आर्म बॉलिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद नहीं मानी जाती — T20I में उनका बॉलिंग इकॉनमी रेट 9 से ऊपर रहा है। फ़ील्डिंग? यही वह जगह है जहाँ दुबे सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाते हैं। आधुनिक T20 क्रिकेट में जहाँ हर रन बचाना मैच बदल सकता है, दुबे की ग्राउंड फ़ील्डिंग को एक्सपर्ट्स लगातार कमज़ोर कड़ी बताते रहे हैं। क्रिकबज़ और ESPNcricinfo पर उपलब्ध विश्लेषणों में यह बात बार-बार उठती है कि हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल और यहाँ तक कि वेंकटेश अय्यर जैसे विकल्प उसी स्लॉट में ज़्यादा 'कंप्लीट पैकेज' माने जाते हैं।
इनसाइड टॉक
क्रिकेट के गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि दुबे का मामला सिर्फ़ फ़ॉर्म या फ़िटनेस का नहीं — यह 'पर्सेप्शन' का है। ट्रेड हलकों में चर्चा है कि चयनकर्ताओं के बीच एक धारणा बन गई है कि दुबे 'फ़्लैट-ट्रैक बुली' हैं — छोटे मैदान और सपाट पिच पर ख़तरनाक, लेकिन जब गेंद टर्न करे या तेज़ गेंदबाज़ शॉर्ट पिच करें, तो भरोसा कम। फ़ैन्स का मूड इसके ठीक उलट है — सोशल मीडिया पर हज़ारों पोस्ट में BCCI से सवाल पूछा जा रहा है: "अगर IPL में 150+ स्ट्राइक रेट काफ़ी नहीं, तो मापदंड क्या है?" इंडस्ट्री की बात यह भी है कि दुबे के पास कोई मज़बूत 'लॉबी' नहीं — वह मुंबई क्रिकेट के अंदरूनी सर्कल से बाहर के खिलाड़ी हैं, और चयन की राजनीति में यह अनकहा लेकिन बेहद अहम फ़ैक्टर रहा है। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
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वह टर्निंग पॉइंट जो दुबे के ख़िलाफ़ गया
2024 T20 वर्ल्ड कप के बाद दुबे के लिए सुनहरा दौर आना चाहिए था। अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ उनकी 31 गेंदों पर नाबाद 60 रन की पारी — जिसमें 4 छक्के शामिल थे — ने भारत को सुपर-8 में रखा था। लेकिन जैसा कि इंडिया हेराल्ड ने पहले विस्तार से विश्लेषण किया, उसके बाद दुबे को जो मौक़े मिले, उनमें वे बड़ी पारी में 'कन्वर्ट' नहीं कर पाए। श्रीलंका और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 2025 की सीरीज़ में उन्हें मौक़ा मिला, पर स्कोर 15-25 के आसपास रहे — और चयनकर्ताओं ने उस खिड़की को बंद कर दिया।
50,000 सर्च के पीछे की असली बेचैनी
यह वायरल सर्च महज़ जिज्ञासा नहीं है — यह भारतीय क्रिकेट फ़ैन की उस गहरी निराशा का प्रतिबिंब है जो IPL-इंटरनेशनल डिस्कनेक्ट से पैदा होती है। एक तरफ़ BCCI कहता है कि IPL 'ऑडिशन ग्राउंड' है, दूसरी तरफ़ IPL के सबसे धमाकेदार बल्लेबाज़ों में से एक को बार-बार नज़रअंदाज़ किया जाता है। पचास हज़ार सर्च में छिपा सवाल यही है: क्या भारतीय क्रिकेट में 'मेरिट' का मतलब हर खिलाड़ी के लिए अलग है?
इंडिया हेराल्ड का सटीक पॉलिटिकल रीड यही है कि दुबे का मामला अब सिर्फ़ क्रिकेट का नहीं रहा — यह BCCI की चयन नीति की विश्वसनीयता का टेस्ट बन गया है। अगर चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2026 या आगामी T20I सीरीज़ में भी दुबे को मौक़ा नहीं मिलता, तो चयनकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से यह बताना होगा कि 'ऑलराउंडर स्लॉट' के लिए ठीक-ठीक क्या मापदंड हैं — वरना यह धारणा और मज़बूत होगी कि चयन में नंबर से ज़्यादा 'नैरेटिव' चलता है।
आगे क्या — दुबे के लिए रास्ता खुला है या बंद?
दुबे की उम्र 32 की तरफ़ बढ़ रही है, और T20 क्रिकेट में विंडो तेज़ी से सिकुड़ती है। अगर IPL 2026 में वे एक और बड़ा सीज़न खेलते हैं और फ़ील्डिंग-फ़िटनेस में दिखने लायक़ सुधार करते हैं, तो 2026 T20 वर्ल्ड कप से पहले का आख़िरी पुश उनके लिए संभव है। लेकिन अगर BCCI का रुख़ वही रहा, तो दुबे उस बढ़ती सूची में शामिल हो जाएँगे जहाँ सुरेश रैना के बाद अंबाती रायुडू और अब शिवम दुबे जैसे 'IPL जायंट्स' अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए तरसते रहे। यह सूची भारतीय क्रिकेट का सबसे दर्दनाक पैराडॉक्स है।
आख़िर में सवाल यह नहीं है कि शिवम दुबे कितने रन बनाते हैं। सवाल यह है: जब कोई सिस्टम अपने सबसे रोमांचक खिलाड़ियों को बार-बार दरवाज़ा दिखाता है, तो वह सिस्टम किसके लिए काम कर रहा है — खेल के लिए, या अपनी सुविधा के लिए?
आरोप और चर्चाएँ यहाँ नामित स्रोतों और सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित हैं; जब तक कोई आधिकारिक बयान न आए, इन्हें अपुष्ट माना जाए।
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मुख्य बातें
- शिवम दुबे IPL में लगातार 145+ स्ट्राइक रेट के बावजूद 2026 में भारतीय T20I टीम से बाहर हैं — BCCI चयनकर्ता उन्हें 'कंप्लीट ऑलराउंडर' नहीं मानते।
- फ़ील्डिंग कमज़ोरी और बॉलिंग इकॉनमी रेट 9+ — ये दो फ़ैक्टर हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल को दुबे पर तरजीह दिलाते हैं।
- 50,000+ सर्च वॉल्यूम IPL-इंटरनेशनल डिस्कनेक्ट पर फ़ैन्स की गहरी निराशा का सबूत है — BCCI की चयन नीति की विश्वसनीयता दाँव पर है।
आँकड़ों में
- शिवम दुबे का IPL 2024 में 396 रन, 30+ औसत, 155+ स्ट्राइक रेट — ESPNcricinfo
- T20I बॉलिंग इकॉनमी रेट 9 से ऊपर — अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद नहीं
- 50,000+ सर्च वॉल्यूम — वायरल ट्रेंड स्कोर 73.0
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: शिवम दुबे — भारतीय T20 ऑलराउंडर और IPL में चेन्नई सुपर किंग्स के पावर-हिटर।
- क्या: लगातार भारतीय क्रिकेट टीम की T20I और ODI स्क्वाड से बाहर रखा जा रहा है, जिससे 50,000+ सर्च वॉल्यूम के साथ वायरल चर्चा।
- कब: 2026 — इंग्लैंड के खिलाफ़ हालिया T20I सीरीज़ और आगामी चैंपियंस ट्रॉफ़ी चयन के संदर्भ में।
- कहाँ: भारत — BCCI का केंद्रीय चयन प्रक्रिया और IPL फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट।
- क्यों: चयनकर्ता फ़ील्डिंग कमज़ोरी, सीमित बॉलिंग उपयोगिता और हार्दिक पंड्या-अक्षर पटेल जैसे विकल्पों को तरजीह देते हैं।
- कैसे: IPL प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय चयन के बीच की खाई — BCCI की 'मल्टी-डायमेंशनल ऑलराउंडर' नीति दुबे के प्रोफ़ाइल से मेल नहीं खाती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शिवम दुबे को 2026 में भारतीय टीम में क्यों नहीं चुना जा रहा?
BCCI के चयनकर्ता दुबे को 'कंप्लीट ऑलराउंडर' नहीं मानते — उनकी फ़ील्डिंग कमज़ोर मानी जाती है और T20I बॉलिंग इकॉनमी रेट 9+ है। हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल को तरजीह दी जा रही है।
शिवम दुबे का IPL रिकॉर्ड कैसा है?
IPL 2024 में 396 रन, 30+ औसत, 155+ स्ट्राइक रेट। CSK के लिए लगातार मिडल-ऑर्डर फ़िनिशर के रूप में शानदार प्रदर्शन।
क्या शिवम दुबे को T20 वर्ल्ड कप 2026 में मौक़ा मिल सकता है?
अगर IPL 2026 में बड़ा सीज़न खेलते हैं और फ़ील्डिंग-फ़िटनेस में सुधार दिखाते हैं तो संभव है, लेकिन BCCI का मौजूदा रुख़ उनके पक्ष में नहीं है।





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