वॉशिंगटन सुंदर भारतीय क्रिकेट के सबसे बहुमुखी ऑलराउंडर हैं — टेस्ट में ब्रिसबेन का हीरो, T20I में इकॉनमी किंग, ODI में उपयोगी बल्लेबाज़। फिर भी BCCI की चयन नीति में वे हमेशा 'बैकअप' की तरह ट्रीट होते हैं, और अब 10,000 से ज़्यादा सर्च में फ़ैन्स यही सवाल पूछ रहे हैं — आख़िर क्यों?
ब्रिसबेन, जनवरी 2021 — ऑस्ट्रेलिया के गब्बा मैदान पर भारत की पीठ दीवार से लगी हुई थी। पहली पारी में 336 के जवाब में टीम लड़खड़ा रही थी और तब 21 साल का एक लड़का, जिसे नंबर सात पर भेजा गया था, ने 62 रन की ऐसी पारी खेली कि पूरा ऑस्ट्रेलिया सन्न रह गया। उस लड़के का नाम था वॉशिंगटन सुंदर। उसी मैच में उसने पहली पारी में तीन विकेट भी लिए। पाँच साल बाद, 2026 में, वही खिलाड़ी गूगल पर 10,000 से ज़्यादा बार सर्च किया जा रहा है — और सवाल वही है जो तब था: इस आदमी को पूरा मौक़ा क्यों नहीं मिलता?
यह सवाल सिर्फ़ फ़ैन्स का नहीं, यह भारतीय क्रिकेट की चयन नीति का सबसे बड़ा ब्लाइंड स्पॉट है।
नंबर बोलते हैं — और ज़ोर से बोलते हैं
वॉशिंगटन सुंदर के आँकड़ों पर ग़ौर करें तो एक विरोधाभास साफ़ दिखता है। ESPN Cricinfo के अनुसार उनका टेस्ट बैटिंग एवरेज 40 के क़रीब रहा है, जो नंबर सात या आठ पर बल्लेबाज़ी करने वाले किसी भी भारतीय ऑलराउंडर के लिए शानदार है। T20I में उनकी इकॉनमी रेट लगातार 7 से नीचे रही है — पावरप्ले में, जहाँ बाक़ी स्पिनर्स पिटते रहे। ODI में इंग्लैंड दौरे जैसी परिस्थितियों में उनकी ऑफ़-स्पिन ड्यूक बॉल पर ख़तरनाक हो सकती है।
फिर भी ICC की रैंकिंग में सुंदर किसी भी फ़ॉर्मेट के टॉप-20 ऑलराउंडर्स में नहीं हैं। इसकी वजह सीधी है — उन्हें लगातार खेलने का मौक़ा ही नहीं मिला।
जडेजा-अक्षर की दीवार
भारतीय क्रिकेट में स्पिनिंग ऑलराउंडर का स्लॉट सबसे भीड़ भरा है। रवींद्र जडेजा — फ़ील्डिंग जीनियस, बाएँ हाथ के स्पिनर, और 300 से ज़्यादा टेस्ट विकेट। अक्षर पटेल — घरेलू पिचों पर जानलेवा, T20 वर्ल्ड कप 2024 का फ़ाइनल हीरो। इन दोनों के आगे सुंदर को जगह कहाँ? BCCI के चयन पैटर्न को देखें तो PTI की रिपोर्ट्स बताती हैं कि चयनकर्ता ऑलराउंडर के लिए अधिकतम दो स्लॉट रखते हैं — और वे स्लॉट जडेजा और अक्षर ने बंधक बना रखे हैं।
लेकिन यहीं बात पेचीदा होती है। जडेजा 2026 में 37 के हो चुके हैं। उनके घुटने की चोटों का इतिहास लंबा है। अक्षर विदेशी पिचों पर ख़ास प्रभावी नहीं रहे — इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में उनका रिकॉर्ड औसत है। ऐसे में सुंदर, जो बल्ले से भी नंबर सात पर टेस्ट अर्धशतक लगा सकते हैं और विदेशी ट्रैक पर ऑफ़-स्पिन से बाउंस निकाल सकते हैं, बेंच पर क्यों बैठे हैं?
इनसाइड टॉक
क्रिकेट के गलियारों में चर्चा है कि सुंदर की 'अनलकी टाइमिंग' ने उनका सबसे ज़्यादा नुक़सान किया। जब वे फ़ॉर्म में होते हैं, चोट आ जाती है। जब फ़िट होते हैं, सीरीज़ ख़त्म हो चुकी होती है। ट्रेड हलकों में यह भी फुसफुसाहट है कि सुंदर का 'शांत स्वभाव' — जो ड्रेसिंग रूम में लाउड नहीं है — उन्हें कैप्टन और कोचिंग स्टाफ़ की पहली पसंद नहीं बनने देता। एक सीनियर क्रिकेट पत्रकार के मुताबिक़, "सुंदर वह खिलाड़ी है जिसे हर कोच चाहता है लेकिन कोई कैप्टन पहले नंबर पर नहीं बोलता।" (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
फ़ैन्स के बीच तो ग़ुस्सा और भी गहरा है। सोशल मीडिया पर घूमता सवाल यह है कि BCCI शिवम दुबे जैसे 'पावर-हिटर' को बार-बार मौक़ा देता है लेकिन सुंदर, जिन्होंने हर बार साबित किया है, उन्हें 'स्पेशलिस्ट विकल्प' बनाकर रख दिया जाता है।
IPL का ट्रैप — या रास्ता?
IPL में सुंदर का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है, और यही शायद उनकी सबसे बड़ी समस्या है। T20 फ़ॉर्मेट में जहाँ छक्कों की बारिश करने वाले ऑलराउंडर्स की माँग है, सुंदर का खेल 'एंकर-कम-होल्डिंग स्पिनर' वाला है — जो टेस्ट के लिए सोना है लेकिन IPL ऑक्शन में चमक नहीं बिखेरता। Cricbuzz के विश्लेषण के अनुसार, IPL 2025 में उनकी स्ट्राइक रेट 120 के आसपास रही जबकि उनकी इकॉनमी 7.5 — दोनों 'अच्छे' लेकिन कोई 'वाह' नहीं। और भारतीय चयन में IPL प्रदर्शन का अघोषित लेकिन असली वज़न हर कोई जानता है।
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इंग्लैंड टूर — सुंदर का सबसे बड़ा मौक़ा?
इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि अगर भारतीय चयन समिति वाक़ई इंग्लैंड दौरे को गंभीरता से ले रही है, तो वॉशिंगटन सुंदर को नज़रअंदाज़ करना एक रणनीतिक ग़लती होगी। इंग्लैंड की पिचें ड्यूक बॉल से ऑफ़-स्पिन को सपोर्ट करती हैं। गब्बा में जिस लड़के ने 62 रन ठोके थे, वह अब 26 साल का अनुभवी क्रिकेटर है। उसकी बल्लेबाज़ी लोअर-मिडल ऑर्डर को गहराई देती है, और उसकी स्पिन पावरप्ले से लेकर मिडिल ओवर्स तक कारगर है।
आने वाले दिनों में देखने लायक़ होगा कि BCCI की चयन समिति जडेजा की फ़िटनेस रिपोर्ट के आधार पर फ़ैसला लेती है या सुंदर को सिर्फ़ 'बैकअप' टैग से आज़ाद करती है। अगर जडेजा की घुटने की तकलीफ़ बढ़ती है — जैसा कि पिछले दो सालों का पैटर्न बताता है — तो सुंदर का नाम अपने-आप ऊपर आएगा। लेकिन सवाल यह है: क्या उन्हें हमेशा किसी और की चोट का इंतज़ार करना पड़ेगा?
ब्रिसबेन का वह 21 साल का लड़का अब 26 का है। आँकड़े उसके पक्ष में हैं, बहुमुखी प्रतिभा उसके पक्ष में है, और अब 10,000 सर्च करने वाले फ़ैन्स भी उसके पक्ष में हैं। बस एक चीज़ उसके पक्ष में नहीं — चयन समिति का वह कमरा, जहाँ शायद ज़ोर से बोलने वाले जीतते हैं और ख़ामोश प्रतिभा बेंच पर बैठी रहती है। वॉशिंगटन सुंदर भारतीय क्रिकेट का वह सवाल है जिसका जवाब बोर्ड को देना ही होगा — अब बेंच बहुत लंबी हो चुकी है।
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मुख्य बातें
- वॉशिंगटन सुंदर का टेस्ट बैटिंग एवरेज नंबर 7-8 पर बल्लेबाज़ी करने वाले भारतीय ऑलराउंडर्स में सर्वश्रेष्ठ में से एक है, फिर भी उन्हें लगातार मौक़े नहीं मिले।
- जडेजा की उम्र (37) और बार-बार की चोटें, और अक्षर पटेल का विदेशी पिचों पर कमज़ोर रिकॉर्ड — दोनों सुंदर के पक्ष में तर्क हैं लेकिन BCCI का चयन पैटर्न बदला नहीं है।
- इंग्लैंड दौरा सुंदर के लिए सबसे बड़ा मौक़ा है — ड्यूक बॉल पर ऑफ़-स्पिन और लोअर-ऑर्डर बैटिंग डेप्थ दोनों काम आएँगे।
आँकड़ों में
- वॉशिंगटन सुंदर का टेस्ट बैटिंग एवरेज नंबर 7-8 पर लगभग 40 — ESPN Cricinfo के अनुसार
- T20I में सुंदर की इकॉनमी रेट लगातार 7 से नीचे रही है, ख़ासकर पावरप्ले में
- रवींद्र जडेजा 2026 में 37 वर्ष के हो चुके हैं और पिछले दो सालों में कम से कम तीन बार घुटने की चोट से बाहर रहे
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: वॉशिंगटन सुंदर — भारतीय ऑलराउंडर जो बाएँ हाथ से बल्लेबाज़ी और दाएँ हाथ की ऑफ़-स्पिन गेंदबाज़ी करते हैं।
- क्या: सुंदर की टीम इंडिया में भूमिका और चयन को लेकर फ़ैन्स में तीव्र बहस छिड़ी है, जो गूगल ट्रेंड्स में 10,000 वॉल्यूम के साथ दिख रही है।
- कब: 2026 में चल रही इंग्लैंड दौरे की तैयारियों और ताज़ा सीरीज़ सिलेक्शन के बीच।
- कहाँ: भारत और इंग्लैंड — जहाँ टीम इंडिया की अगली बड़ी परीक्षा है।
- क्यों: रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल के वर्चस्व, फ़िटनेस की चिंताओं और चयन नीति की अनिश्चितता के कारण सुंदर नियमित इलेवन में जगह नहीं बना पा रहे।
- कैसे: BCCI और चयन समिति ऑलराउंडर स्लॉट में जडेजा-अक्षर को प्राथमिकता देती है; सुंदर को इंजरी-रिप्लेसमेंट या 'स्पेशलिस्ट कंडीशन' में ही मौक़ा मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वॉशिंगटन सुंदर को टीम इंडिया में रेगुलर जगह क्यों नहीं मिलती?
मुख्य कारण है जडेजा और अक्षर पटेल का ऑलराउंडर स्लॉट पर वर्चस्व। BCCI अधिकतम दो स्पिनिंग ऑलराउंडर रखता है और सुंदर को तीसरे विकल्प के रूप में देखा जाता है, भले ही उनके आँकड़े प्रतिस्पर्धी हैं।
वॉशिंगटन सुंदर का सबसे यादगार प्रदर्शन कौन सा है?
ब्रिसबेन टेस्ट 2021 — जहाँ उन्होंने पहली पारी में 3 विकेट और 62 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेलकर भारत की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।
क्या इंग्लैंड दौरे में वॉशिंगटन सुंदर को मौक़ा मिलेगा?
ड्यूक बॉल पर ऑफ़-स्पिन कारगर होती है और जडेजा की फ़िटनेस अनिश्चित है — इसलिए विश्लेषकों का मानना है कि सुंदर की संभावना इस बार पहले से बेहतर है, लेकिन अंतिम फ़ैसला BCCI चयन समिति पर निर्भर करेगा।
वॉशिंगटन सुंदर किन फ़ॉर्मेट्स में खेलते हैं?
सुंदर तीनों फ़ॉर्मेट्स — टेस्ट, ODI और T20I — में भारत के लिए खेल चुके हैं। इसके अलावा वे IPL में भी नियमित हैं।





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